LFT टेस्ट नॉर्मल रेंज — लिवर फंक्शन रिपोर्ट हिंदी में
LFT यानी Liver Function Test खून की कुछ जांचों का एक ग्रुप है जो बताता है कि आपका लिवर (जिगर/कलेजा) ठीक से काम कर रहा है या नहीं। इसे "लिवर प्रोफाइल" या "लिवर की जांच" भी कहते हैं। इसमें SGPT (ALT), SGOT (AST), Bilirubin, ALP, GGT, Total Protein और Albumin देखे जाते हैं।
लिवर शरीर से ज़हरीले पदार्थ निकालता है, खाना पचाने के लिए पित्त (bile) बनाता है, ताकत जमा करता है और खून जमने वाले प्रोटीन बनाता है। भारत में फैटी लिवर बहुत आम हो गया है, और अक्सर इसका पहला संकेत LFT में थोड़ा बढ़ा हुआ SGPT ही होता है।
पीलिया (जॉन्डिस), शराब पीने की आदत, टीबी या कोलेस्ट्रॉल की दवा शुरू करने से पहले, या सालाना हेल्थ चेकअप में डॉक्टर LFT करवाते हैं। नीचे हर वैल्यू की नॉर्मल रेंज और उसके कम-ज़्यादा होने का मतलब आसान भाषा में दिया गया है।
LFT टेस्ट (लिवर फंक्शन टेस्ट) नॉर्मल रेंज चार्ट
| पैरामीटर | नॉर्मल रेंज | ज़्यादा होने का मतलब | कम होने का मतलब |
|---|---|---|---|
| SGPT / ALT (एसजीपीटी) | 7–56 U/L | फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, शराब से लिवर को नुकसान या किसी दवा का लिवर पर असर। | कम SGPT आमतौर पर किसी बीमारी का संकेत नहीं होता, चिंता की बात नहीं। |
| SGOT / AST (एसजीओटी) | 10–40 U/L | लिवर को नुकसान, हेपेटाइटिस, शराब, हार्ट अटैक या मांसपेशियों में चोट से बढ़ सकता है। | कम SGOT आमतौर पर किसी बीमारी का संकेत नहीं माना जाता। |
| Total Bilirubin (टोटल बिलीरुबिन) | 0.1–1.2 mg/dL | पीलिया, हेपेटाइटिस, पित्त की नली में पथरी से रुकावट, या खून की कोशिकाओं का ज़्यादा टूटना। | कम बिलीरुबिन का आमतौर पर कोई खास मेडिकल मतलब नहीं होता। |
| Direct Bilirubin (डायरेक्ट बिलीरुबिन) | 0.0–0.3 mg/dL | पित्त की नली में रुकावट (obstructive jaundice), पथरी या लिवर की बीमारी का संकेत। | कम होने का आमतौर पर कोई खास मेडिकल मतलब नहीं होता। |
| Indirect Bilirubin (इनडायरेक्ट बिलीरुबिन) | लगभग 0.2–0.9 mg/dL (Total में से Direct घटाकर) | खून की लाल कोशिकाओं का ज़्यादा टूटना (hemolysis) या Gilbert syndrome जैसी हल्की स्थिति। | कम होने का आमतौर पर कोई खास मेडिकल मतलब नहीं होता। |
| Alkaline Phosphatase / ALP (एल्कलाइन फॉस्फेटेज़) | 44–147 U/L | पित्त की नली में रुकावट, हड्डी की बीमारी, लिवर की बीमारी; प्रेगनेंसी और बढ़ते बच्चों में ज़्यादा आना नॉर्मल है। | कुपोषण, हाइपोथायरॉइडिज़्म (थायराइड कम) या ज़िंक की कमी। |
| Total Protein (टोटल प्रोटीन) | 6.0–8.3 g/dL | लंबा चलने वाला इन्फेक्शन, मल्टीपल मायलोमा या पानी की कमी। | लिवर की बीमारी, कुपोषण, या किडनी से प्रोटीन निकलना (nephrotic syndrome)। |
| Albumin (एल्ब्यूमिन) | 3.5–5.5 g/dL | आमतौर पर पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) की वजह से बढ़ा हुआ आता है। | लिवर की पुरानी बीमारी, कुपोषण, किडनी की बीमारी या लंबी सूजन; पैरों में सूजन हो सकती है। |
| GGT (गामा-जीटी) | 9–48 U/L | शराब पीना, पित्त की नली की बीमारी, फैटी लिवर या कुछ दवाइयों का असर। | कम GGT का आमतौर पर कोई खास मेडिकल मतलब नहीं होता। |
| Globulin (ग्लोब्युलिन) | लगभग 2.0–3.5 g/dL (Total Protein में से Albumin घटाकर) | लंबा इन्फेक्शन, ऑटोइम्यून बीमारी, लिवर सिरोसिस या मल्टीपल मायलोमा में बढ़ सकता है। | कुपोषण, इम्यूनिटी की कमी या किडनी से प्रोटीन निकलने में कम हो सकता है। |
| A/G Ratio (एल्ब्यूमिन-ग्लोब्युलिन अनुपात) | लगभग 1.0–2.0 (लैब के हिसाब से थोड़ा अलग) | ज़्यादा होना आमतौर पर गंभीर नहीं, कभी-कभी ग्लोब्युलिन कम होने से होता है। | 1 से कम होना लिवर सिरोसिस, किडनी की बीमारी या लंबे इन्फेक्शन की ओर इशारा कर सकता है। |
हर लैब की रेफरेंस रेंज थोड़ी अलग हो सकती है। अपनी रिपोर्ट पर छपी रेंज को ही मानें।
रिपोर्ट कैसे समझें?
- ✓हर लैब की Reference Range थोड़ी अलग होती है — कई भारतीय लैब SGPT की ऊपरी सीमा 40 या 45 U/L लिखती हैं। अपना नंबर हमेशा उसी रिपोर्ट में छपी रेंज से मिलाएं।
- ✓नॉर्मल से बाहर वाली वैल्यू के आगे "H" (High) या "L" (Low) लिखा होता है या वह बोल्ड में छपती है। LFT में सबसे पहले SGPT, SGOT और Total Bilirubin देखें।
- ✓SGPT नॉर्मल से 2 गुना तक (लगभग 100 U/L तक) बढ़ा हो तो अक्सर फैटी लिवर होता है, जो खान-पान और कसरत से सुधर सकता है। 5–10 गुना से ज़्यादा बढ़ना हेपेटाइटिस जैसी गंभीर वजह की ओर इशारा करता है।
- ✓Bilirubin बढ़ा हो तो Direct और Indirect दोनों देखें: Direct ज़्यादा बढ़ा हो तो पित्त की नली में रुकावट की संभावना होती है, Indirect ज़्यादा हो तो खून की कोशिकाओं के टूटने की।
- ✓Albumin और Total Protein लिवर की "ताकत" बताते हैं। SGPT नॉर्मल हो लेकिन Albumin कम हो, तो पुरानी लिवर बीमारी या कुपोषण के लिए डॉक्टर आगे जांच करवा सकते हैं।
- ✓एक बार कोई वैल्यू थोड़ी सी बढ़ी आना (जैसे SGPT 60) आम है — भारी कसरत, दवा या रात की पार्टी से भी हो सकता है। 4–6 हफ्ते बाद दोबारा टेस्ट करवाकर ट्रेंड देखना ज़्यादा भरोसेमंद है।
टेस्ट से पहले की तैयारी
- • 8–12 घंटे खाली पेट (फास्टिंग) सैंपल देने की सलाह दी जाती है; इस दौरान सादा पानी पी सकते हैं।
- • टेस्ट से कम से कम 24 घंटे पहले शराब बिल्कुल न पिएं।
- • सभी दवाइयां, आयुर्वेदिक/हर्बल दवाएं और सप्लीमेंट के बारे में डॉक्टर को बताएं; कोई दवा अपने मन से बंद न करें।
- • टेस्ट से एक दिन पहले बहुत भारी कसरत से बचें, इससे SGOT बढ़ सकता है।
- • रिपोर्ट आमतौर पर 4–6 घंटे में मिल जाती है।
यह टेस्ट कब करवाएं?
- • आंखों या त्वचा में पीलापन (पीलिया) दिखे
- • पेशाब गहरा पीला हो या मल (टट्टी) का रंग हल्का/सफ़ेद हो
- • पेट के दाहिनी तरफ़ ऊपर दर्द या भारीपन
- • भूख न लगना, जी मिचलाना या लगातार थकान
- • नियमित रूप से शराब पीते हों
- • टीबी की दवा, कोलेस्ट्रॉल की दवा (statins) या लंबी दवा शुरू करने से पहले
- • Hepatitis B या C का इन्फेक्शन पता हो
- • सालाना हेल्थ चेकअप में, खासकर मोटापा या डायबिटीज़ हो तो
डॉक्टर को तुरंत कब दिखाएं?
- ⚠ SGPT या SGOT 200 U/L से ऊपर हो (नॉर्मल से लगभग 5 गुना) — जल्द डॉक्टर को दिखाएं
- ⚠ Total Bilirubin 3 mg/dL से ऊपर हो या आंखें-त्वचा साफ़ पीली दिख रही हों
- ⚠ Albumin 3.0 g/dL से कम हो और पैरों या पेट में सूजन (पानी भरना) हो
- ⚠ खून की उल्टी, काला मल, बहुत ज़्यादा नींद या भ्रम हो — तुरंत इमरजेंसी में जाएं
- ⚠ पीलिया के साथ तेज़ बुखार और पेट के दाहिने हिस्से में तेज़ दर्द
- ⚠ टीबी या कोई नई दवा शुरू करने के बाद जी मिचलाना, उल्टी और पीलापन दिखे
इमरजेंसी में: 0755-4260605 (24x7) · इमरजेंसी सेवा
भोपाल में LFT टेस्ट (लिवर फंक्शन टेस्ट) का खर्च
₹300 – ₹800
आर.के. हॉस्पिटल, इंद्रपुरी की अपनी पैथोलॉजी लैब में उसी दिन रिपोर्ट।
पूरा खर्च देखें →अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
LFT टेस्ट की नॉर्मल रेंज कितनी होती है?
LFT में SGPT (ALT) 7–56 U/L, SGOT (AST) 10–40 U/L, Total Bilirubin 0.1–1.2 mg/dL और Direct Bilirubin 0.0–0.3 mg/dL नॉर्मल है। ALP 44–147 U/L, GGT 9–48 U/L, Total Protein 6.0–8.3 g/dL और Albumin 3.5–5.5 g/dL होना चाहिए। आपकी लैब की रेंज थोड़ी अलग हो सकती है।
SGPT 100 होना कितना खतरनाक है?
SGPT 100 U/L नॉर्मल से लगभग 2 गुना है, जिसका मतलब है लिवर की कोशिकाओं पर कुछ दबाव है। भारत में इसकी सबसे आम वजह फैटी लिवर है, लेकिन शराब, दवाइयां या हेपेटाइटिस भी कारण हो सकते हैं। घबराएं नहीं, पर डॉक्टर को दिखाएं — वे अल्ट्रासाउंड और हेपेटाइटिस की जांच से असली वजह पता करेंगे।
क्या LFT टेस्ट के लिए खाली पेट जाना ज़रूरी है?
हां, 8–12 घंटे की फास्टिंग की सलाह दी जाती है ताकि Bilirubin और Protein की वैल्यू सही आएं। फास्टिंग के दौरान सादा पानी पी सकते हैं। टेस्ट से 24 घंटे पहले शराब न पिएं।
Bilirubin कितना होने पर पीलिया होता है?
नॉर्मल Total Bilirubin 0.1–1.2 mg/dL होता है। जब यह 2–3 mg/dL से ऊपर जाता है, तब आंखों और त्वचा में पीलापन दिखने लगता है। इसकी वजह लिवर की बीमारी, पित्त की नली में रुकावट या खून की कोशिकाओं का ज़्यादा टूटना हो सकती है।
LFT कितने समय में दोबारा करवाना चाहिए?
स्वस्थ लोगों को साल में एक बार काफ़ी है। अगर लिवर की बीमारी है, नियमित शराब पीते हैं, या टीबी, कोलेस्ट्रॉल या दर्द की दवा लंबे समय से चल रही है, तो हर 3–6 महीने में डॉक्टर की सलाह से करवाएं।
भोपाल में LFT टेस्ट कितने का होता है?
भोपाल में LFT टेस्ट लगभग ₹300 से ₹800 में होता है, लैब और पैरामीटर के हिसाब से। आर.के. हॉस्पिटल में उसी दिन रिपोर्ट मिल जाती है। आर.के. हॉस्पिटल, इंद्रपुरी में जांच करवाएं: 0755-4260605
दूसरे टेस्ट की नॉर्मल रेंज (हिंदी में)
- KFT / RFT टेस्ट (किडनी फंक्शन टेस्ट) नॉर्मल रेंज →
- CBC टेस्ट (कम्प्लीट ब्लड काउंट) नॉर्मल रेंज →
- 2D Echo टेस्ट (इकोकार्डियोग्राफी) नॉर्मल रेंज →
- लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल टेस्ट) नॉर्मल रेंज →
- यूरिन टेस्ट (पेशाब की जांच) नॉर्मल रेंज →
- HbA1c टेस्ट (3 महीने की औसत शुगर) नॉर्मल रेंज →
- थायराइड टेस्ट (TSH, T3, T4) नॉर्मल रेंज →
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LFT टेस्ट (लिवर फंक्शन टेस्ट) आर.के. हॉस्पिटल में करवाएं
इंद्रपुरी, भोपाल (बीमा हॉस्पिटल के पास) में अपनी पैथोलॉजी लैब। उसी दिन रिपोर्ट, और हमारे डॉक्टर रिपोर्ट समझाएंगे। कॉल करें, WhatsApp करें या सीधे आएं।
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यह जानकारी सिर्फ़ शिक्षा के लिए है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी रिपोर्ट के बारे में हमेशा डॉक्टर से बात करें।